अलीगढउत्तर प्रदेश

AMU में 17 दिन से भूख हड़ताल, आधी रात पहुंचा प्रशासन तो भड़के छात्र, जानिए आखिर क्या है पूरा विवाद

AMU में छात्रसंघ चुनाव की बहाली को लेकर 17 दिन से प्रदर्शन जारी है। यासिर फहद भूख हड़ताल पर हैं। प्रशासन से गतिरोध नहीं टूटा, कैंपस में तनाव बढ़ा।

Reported by Shagun Chaurasia and edited by Shagun Chaurasia

AMU Student Protest: अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में छात्रसंघ चुनाव की बहाली को लेकर शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब लगातार 17वें दिन भी जारी है। 21 सितंबर से कैंपस में चल रहे इस आंदोलन का केंद्र छात्र नेता यासिर फहद बने हुए हैं, जो अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की चिंता बढ़ गई है।

आधी रात बढ़ा तनाव

मंगलवार देर रात प्रशासनिक अधिकारी धरना खत्म कराने और छात्रों से बातचीत के लिए प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे। इस दौरान छात्रों ने जमकर नारेबाजी की। स्थिति को देखते हुए कैंपस के बाहर पुलिस बल तैनात किया गया। छात्रों का आरोप है कि अनूपशहर रोड की ओर स्थित हॉस्टलों से विद्यार्थियों को प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने से रोकने की कोशिश की गई।

छात्राओं के हॉस्टल के बाहर भी जुटी भीड़

प्रदर्शन के बीच छात्राओं के हॉस्टलों के बाहर भी नारेबाजी की आवाजें सुनाई दीं। बड़ी संख्या में छात्राएं हॉस्टल गेट के पास जमा हो गईं। इससे कैंपस और आसपास का माहौल तनावपूर्ण हो गया। प्रदर्शनकारी छात्रों के मुताबिक, रात में भी करीब 100 छात्र कैंपस के ‘डक पॉइंट’ पर मौजूद रहते हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि वे अपनी मांगें पूरी होने तक पीछे हटने वाले नहीं हैं।

अब चार मांगों पर अड़े छात्र

आंदोलन की शुरुआत छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग के साथ हुई थी। लेकिन प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं के बाद छात्रों ने अपनी मांगों की संख्या बढ़ाकर चार कर दी है।

छात्रों की प्रमुख मांगें हैं:

छात्रसंघ चुनाव की तारीख घोषित की जाए और चुनाव अधिकारी नियुक्त किया जाए।
विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर का इस्तीफा लिया जाए।
प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस ली जाए।
निलंबित किए गए छात्रों का सस्पेंशन खत्म किया जाए।
‘ठोस पहल होने तक जारी रहेगा धरना’

बीटेक छात्र मोहम्मद उमैश सिद्दीक़ी का कहना है कि छात्र लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात विश्वविद्यालय प्रशासन तक पहुंचा रहे हैं। उनके मुताबिक, छात्रसंघ की बहाली को लेकर अभी तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस फैसला सामने नहीं आया है। छात्रों का कहना है कि जब तक चुनाव बहाल करने की दिशा में स्पष्ट कदम नहीं उठाया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

प्रशासन ने क्या कहा?

विश्वविद्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, सोमवार देर रात छात्र नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने कुलपति प्रोफेसर नईमा खातून से मुलाकात की। बातचीत को गतिरोध खत्म करने की दिशा में शुरुआती कदम माना जा रहा है, हालांकि अभी अंतिम समाधान नहीं निकला है। अधिकारी के अनुसार, कुलपति ने छात्रसंघ को जल्द बहाल करने की बात दोहराई है। हालांकि, छात्रों की ओर से अगले तीन सप्ताह के भीतर चुनाव कराने की मांग को पूरा करना फिलहाल संभव नहीं बताया गया है।

AMU के प्रॉक्टर नावेद खान ने कहा कि भूख हड़ताल कर रहे यासिर फहद की सेहत पर विश्वविद्यालय लगातार नजर रख रहा है। डॉक्टरों की टीम उनकी चौबीसों घंटे निगरानी कर रही है। प्रशासन का कहना है कि छात्र को किसी तरह का नुकसान न हो, इसके लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। प्रॉक्टर के मुताबिक, छात्रसंघ चुनाव के लिए एक ‘उचित और व्यावहारिक समय-सीमा’ तय करने की कोशिश चल रही है।

AMU में छात्रसंघ चुनाव इतना अहम क्यों?

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की छात्र राजनीति का अपना लंबा इतिहास रहा है। यहां से पूर्व राष्ट्रपति डॉ. जाकिर हुसैन, पूर्व उपराष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी, बिहार के पूर्व राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान और समाजवादी पार्टी के नेता मोहम्मद आजम खान जैसे कई चर्चित नाम जुड़े रहे हैं। सिनेमा और साहित्य की दुनिया में भी AMU के पूर्व छात्रों की लंबी सूची है। नसीरुद्दीन शाह, सईद जाफरी, कुलभूषण खरबंदा, अनुभव सिन्हा, मुजफ्फर अली, ख्वाजा अहमद अब्बास, जावेद अख्तर, मजरूह सुल्तानपुरी, बशीर बद्र, जां निसार अख्तर, राही मासूम रजा और कैफी आजमी जैसे नामों ने भी इस विश्वविद्यालय में पढ़ाई की है।

इसी वजह से AMU में छात्रसंघ चुनाव की बहाली का मुद्दा केवल कैंपस की राजनीति तक सीमित नहीं माना जा रहा। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि 17 दिन से जारी भूख हड़ताल और बढ़ते तनाव के बीच प्रशासन और छात्रों के बीच आखिर समझौते का रास्ता कब निकलता है?

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